Fri. Nov 15th, 2019
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अदभुत-
साहित्य की एक ऐसी अदभुत दुनिया, जो कहानियों, कविताओं, विचारों, समीक्षाओं, जीवनचरित्रों के माध्यम से पाठकों की ज्ञान-पिपासा को न सिर्फ शांत करती है अपितु उन्हें सामाज, सांस्कृति और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी बनाने में सहायता भी देती है.

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माँ

मां बाप की वर्षी याद नहीं

हम भूल गए नौ मासों को ,जो मां ने कष्ट उठाए थे भूल गए उन उम्मीदों को जिनसे,मां ने हमको ...
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धंधे मातरम

धंधे मातरम

(कर्म ही पूजा है) इसके-उसके काम करूं मैं, चिंता नहीं आराम की। वक्त की रेत मुट्ठी से फिसले, तब याद ...
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बोल !

बोल बिना तोल, ओल का मोल, होठ हुए गोल, सारे राज खोल, क्या है झोल, कुछ तो बोल। बोल अनमोल, ...
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हिन्दीओज कविता –सर पैदा होना चाहिए |

कट जाए शाने हिन्द भारती वो सर पैदा होना चाहिए |  करे जो नेस्तनाबूद दुश्मन पर वो मादा होना चाहिए ...
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बात करते हैं!

बात करते हैं,समस्याओं की,शिकायतें,सुझाव,निदान,प्रयास करता कौन?पहल करता कौन?बात करते हैं! निशा,तिमिर,घोर अंधकार,जानते हैं सभी,जीते हैं सभी,उनसे लड़ता कौन?सहर करता कौन?बात ...
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यहाँ कौन है

श्रद्धेय गोपाल दास 'नीरज' जी को सादर समर्पित  कौन दाता है और कौन याचक, इस भौतिक संसार में सभी को ...
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लघुकथा: समोसे की चटनी

वो घर के पास में ही समोसों का ठेला लगाता था। और जहां तक मैं जान पाया था भला आदमी ...
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उत्कर्ष – नववर्ष

हे ! नव संवत् तुम्हारा कोटि अभिनंदन ब्राह्मा जी ने किया चैत्र में सृष्टि सृजन । वर्ष प्रतिपदा का दिन ...
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नारी तुम्हे नमन

ईश्रवर की सन्तान है, दोनों नर और नारी । प्रकृति ने दोनों में ही, शक्ति भरी है सारी । समाज ...
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होली

सन सन सनन फाल्गुन की हवा चली उड़ी अबीर और गुलाल छाया हर्ष और उल्लास होली आई रंग रंगीली ओढ़ ...
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होली

होली मन की रीत बनी है, होली मन की प्रीत बनी है। होली सब के दिल में बसी, होली ही ...
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गज़ल – ०२

उसको अहसास -निदामत ने रुलाया होगा जब कभी खत को मेरे उसने जलाया होगा। ख़ुद को नज़रों से मेरी उसने ...
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कैसे मैं कहूँ

सोचता है दिल जो, उसे कैसे मैं कहूँ, भूल जाऊं बातें सभी, हो के रूबरू. मेरे सामने वो कभी, आये ...
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रेत के पन्ने

डर लगता है लड़खड़ाते कदमों से, नन्हें परिंदों ने अपने पंख खोल रक्खे हैं. किसने दिये हैं इनको हौसले, न ...
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इतिहास की सच्चाई

हारा हुआ 'गोरी' महान हो गया, जब जयचंद गद्दार भाई-जान हो गया. इतिहास को छेड़कर तुम देते हो सीख, कि ...
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खुली किताब

मैं खुली एक किताब हो जाऊं, तू पीये तो शराब हो जाऊं. मैं तेरे प्यार से मुकम्मल हूँ, तू कहे ...
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