अदभुत

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अदभुत-
साहित्य की एक ऐसी अदभुत दुनिया, जो कहानियों, कविताओं, विचारों, समीक्षाओं, जीवनचरित्रों के माध्यम से पाठकों की ज्ञान-पिपासा को न सिर्फ शांत करती है अपितु उन्हें सामाज, सांस्कृति और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी बनाने में सहायता भी देती है.

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यहाँ कौन है

श्रद्धेय गोपाल दास 'नीरज' जी को सादर समर्पित  कौन दाता है और कौन याचक, इस भौतिक संसार में सभी को कुछ चाहिए और जिसके पास ...
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लघुकथा: समोसे की चटनी

वो घर के पास में ही समोसों का ठेला लगाता था। और जहां तक मैं जान पाया था भला आदमी था। राजनीति की चर्चा थोड़ा ...
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बच्चों को उत्तम मानव बनायें

बच्चों के व्यक्तित्व का मूल्यांकन उनके द्वारा प्राप्त अंको के आधार पर न करके उनके द्वारा किये साध्य के आधार पर करें । शिक्षा एक ...
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सामाजिक उपादेयता और आप

सामाजिक उपादेयता और आप

हमें आज हर तरफ बहुत कुछ होता दिखाई पड़ जाता है, गाहे-बगाहे सुनाई भी पड़ जाता है. और तो और हम सोशल मीडिया के अनुप्रयोग ...
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उत्कर्ष – नववर्ष

हे ! नव संवत् तुम्हारा कोटि अभिनंदन ब्राह्मा जी ने किया चैत्र में सृष्टि सृजन । वर्ष प्रतिपदा का दिन ,चैत्र का महिना अयोध्या के ...
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नारी तुम्हे नमन

ईश्रवर की सन्तान है, दोनों नर और नारी । प्रकृति ने दोनों में ही, शक्ति भरी है सारी । समाज ने दोनों में, अन्तर कर ...
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होली

सन सन सनन फाल्गुन की हवा चली उड़ी अबीर और गुलाल छाया हर्ष और उल्लास होली आई रंग रंगीली ओढ़ चली प्रीत की चुन्नर चंग ...
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त बुझिह फगुनवा में होली आ गईल

जब पियर सरसो फुलाए लगल, अमवा के डाली कोयल गाए लगल, होत भोरवा घरवा मे लाली आ गइल, त बुझीह फगुनवा मे होली आ गइल| ...
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होली

होली मन की रीत बनी है, होली मन की प्रीत बनी है। होली सब के दिल में बसी, होली ही सबका गीत है।। फागुन की ...
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गज़ल – ०२

उसको अहसास -निदामत ने रुलाया होगा जब कभी खत को मेरे उसने जलाया होगा। ख़ुद को नज़रों से मेरी उसने बचाया होगा पास रह कर ...
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