Fri. Nov 15th, 2019

यह समर आज अंतिम होगा

यह समर आज अंतिम होगा

मत सोच कि यह मद्धिम होगा

मिट जाएगा अब सब अंतर

हर भय होगा अब छू-मंतर

हर दिशा आज संवाद करे

हर क्षण हर पल अनुनाद भरे

बिछड़े का होगा आज मिलन

बिन ब्याही बने नहीं दुल्हन

अब नहीं हो रही है हानि

सब दूर हो रही मनमानी

अब हुआ तिरोहित सब शोषण,

हर गांव-गली है अब रोशन

अब हो अमीर या हो गरीब

इक दूजे के होते करीब

जो भ्रष्ट बने सत्ताधारी, सिंहासन अब उनका डोले

जो बन बैठे थे मूक मगर, अब वे भी अपना मुंह खोले

अब अच्छे लोग चुने जाते

वो सबकी आज सुने जाते

अब सब मिलकर सब बाँट रहे

गहरी नींदे, ना खाट रहे

तौलें भी, अब ना बाट रहे

सबकी अब अच्छी ठाट रहे

अब कोई न बंदरबांट करे

सब अपनी-अपनी घाट रहे,

जो सोते आज बिना रोटी उनके घर आज सने आटा

दुःख दर्द भी अब इक दूजे का है मिलकर के सबने बाँटा।

राजेश पाठक
प्रांतीय सचिव,
राष्ट्रीय कवि संगम,
झारखण्ड इकाई.

1 thought on “यह समर आज अंतिम होगा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!