Sat. Feb 16th, 2019

कहानी

अदभुत कहानियों की श्रेणी.

गोबर

आखिर यह कैसी विडंबना है कि हम आत्मशुद्धि के नाम पर शरीर चमकाते हैं और स्वच्छता के नाम पर अपना घर जबकि मन अन्दर से और घर बाहर से मैला ही रह जाता है. पार्षद जी ने मन ही मन ठान लिया कि वे आने वाले गणतंत्र दिवस पर मास्टर जी को सम्मानित करेंगे स्वच्छता में अपना योगदान देने के लिए.

मांग

कॉलेज के पीछे वाले ग्राऊंड में बहुत सारे पेड़ों के बीच एक लंबे–चौड़े छाया वाले पेड़ के

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