Tue. Dec 18th, 2018
बेटी बचाओ बेटी पढाओ

पायल छनकाती बेटियां
मधुर संगीत सुनाती बेटियां

पिता की साँस बेटियां
जीवन की आस बेटियां

हाथों की लकीर बेटियां
राखी की डोर बेटियां

उचाईयों को छू जाती बेटियां
होसला बढ़ा जाती बेटियां

चाँद -तारों से प्यारी बेटियां
उम्मीद की किरण बेटियां

मेहंदी रचाती रहती बेटियां
ख्वाबो के रंग सजाती बेटियां

ससुराल जब जाती बेटियां
यादें घरों मे छोड़ जाती बेटियां

जब -जब संदेशा भेजती बेटियां
मन को खुश कर जाती बेटियां

आँखों मे सदा ही बसती बेटियां
आंसू बन संग हमारे रहती बेटियां

मातापिता का बनती सहारा बेटियां
मजबूत रिश्तों का बंधन होती बेटियां

:रचयिता
संजय वर्मा “दृष्टी”

2 thoughts on “बेटियाँ

  1. ये बिल्कुल ही सच है कि हमारी देश की बेटियां किसी भी बेटे से कहीं भी कम नहीं है। लेकिन हमारा समाज मे कुछ दरिंदे लोग है जो हमारी बेटियों को सम्पूर्ण आजादी के साथ आज भी बेटियों को खुली आजादी नहीं मिल पा रहीं है। जिस दिन बेटियों को खुली आजादी मिल जाएगी उस दिन हमारा देश विकसित राष्ट्र का हकदार बन जायेगा।
    इसलिए मैं अपने देश वासियों से निवेदन करता हुँ की हे भारत के वासियों बेटियों को सम्पूर्ण आजादी दो ताकि देश जल्द ही विकसित राष्ट्र बनें।
    आपका विश्वासभजन
    ओम प्रकाश
    Social worker
    Bokaro, jharkhand

  2. बेटियां ही शक्ति का स्वरूप हैं,
    इनके बिना तब छांव भी तब धूप है.

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