Tue. Dec 18th, 2018

सन सन सनन फाल्गुन की हवा चली
उड़ी अबीर और गुलाल
छाया हर्ष और उल्लास
होली आई रंग रंगीली

ओढ़ चली प्रीत की चुन्नर
चंग की झंकार पर लेती लुर
रंग रसिया मोहे मन बसिया
पिया ने भिगोई प्रेम की चुन्नर

झांकी सजी गेर की
गाते फ़ाग गीत की टेर
आओ साथियों होली खेले
हाथो में लेकर रंग की पिचकारी

चढ़ी भांग की खुमारी
आओ मिलकर झूमे नाचे गाये
रंग जमे मानवीय रिश्तो पर
प्रेम व भाईचारे के फूल खिले

लेकर गेंहू, चने की बलिया
प्रदोष वेला पर करे होलिका दहन
धु धु कर बुराई का चोला जले
हुई बुराई पर अच्छाई की जीत ।।

: रचयिता
एल. आर. सेजु थोब ‘प्रिंस’
जोधपुर राजस्थान

1 thought on “होली

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