Tue. Dec 18th, 2018
माँ

कवि युगराज जैन का काव्य संग्रह “माँ” की काव्य रचनाओ में शीर्षकानुसार, माँ पर समर्पित काव्य संग्रह में, माँ की ममतामयी झलक की स्पष्ट छवि दिखलाई पड़ती है। यही समर्पण भाव काव्यसंग्रह को एक नई ऊँचाइयों पर ले जाकर ममतामयी स्नेह का पक्ष निखारता है। सुन्दर पंक्तियों में देखे, माँ के अंतर्मन की प्यास जो कि हर माँ के दिलों में रहती है कि गहराई में जाकर माँ के प्रति ललक पाने की प्रीत को बहुत ही बेहतर ढंग से शब्दों में कवि युगराज जैन ने लिखा है कि “माँ की ममता की गहराई, सागर से भी गहरी व उसका प्यार अम्बर से भी ऊँचा है” ये ही तो जीवन का सच है।

वर्तमान में कुछ लोग माँ की उपेक्षा करने लगे तब कवि के भाव, एक और सच को उजागर करते है-“जब बेटे माँ की उपेक्षा करने लग जाते है, तब बेटिया ही माँ के लिए दुलार बन जाती है। माँ ही उसकी प्रथम गुरु होती है, यही क्रम उसकी बिटियाँ को भी सिखाती है, विधा माँ देती है, कवि ने ममता के भाव को अपनी कलम से बेहतर तरीके से “माँ” काव्य संग्रह में ढाला है, जो कि काबिले तारीफ है। ममता, प्रेम, क्षमा, दया, त्याग, मोह और कर्तव्य में सुलभ गुण समाहित है, यही गुण संस्कार और व्यक्तित्व की धुरियों को मजबूत प्रदान कर सुखदाता के स्वर “माँ” धरा पर पहला शब्द इंसान को देते है।

काव्य पंक्तियों को देखे तो-
“हर उत्तम से माँ सर्वोत्तम है
हर सुंदरता से माँ सुन्दरतम है
माँ तो ममता का उजाला है
बच्चे की प्रथम पाठशाला है

काव्य में तनिक झांके-
माँ एक वृक्ष है फलदार
माँ है पतितपावनी गंगा की धार
पत्थर को हीरा बनाए वो शिल्पकार
बिन बोले माँ सुनती पुत्र की पुकार

इसके अलावा काव्य संग्रह की सभी रचनाये एक से बढ़ कर एक है। साहित्य सृजन में उम्दा कृति अपनी पहचान का परचम अवश्य फहराएगी। बेहतरीन आवरण से माँ के रंगीन चित्रो से सजी धजी बेहतर कृति हेतु कवि युगराज जैन को हार्दिक बधाई और आगामी कृति हेतु शुभकामनाएं।

कविता संग्रह- माँ
रचनाकार- युगराज जैन
प्रकाशक- युग प्रवाह
हिंद इलेक्ट्रानिक नागु सयाजी वाडी
न्यू प्रभा देवी रोड मुंबई 400025

: समीक्षक
संजय वर्मा “दृष्टि”
125 शहीद सिंग मनावर
जिला -धार (म प्र )454446

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