Tue. Dec 18th, 2018

बचपन बचाओ

बचपन बचाओ

बचपन सबका निश्छल होता,

मन में न कहीं कोई छल होता

बस होती एक शरारत है,

पर समझो इसकी इजाजत है.

बच्चे भारत के भविष्य हैं,

इनसे नाता जोड़ो.

कुछ पैसे की खातिर अब,

कभी न इनको छोड़ो.

बचपन तभी बचेगा यारों,

घर में मिले जब रोटी.

बात देखने में जो लगे,

पर बात नहीं यह छोटी

रोटी के खातिर छिनता है

बचपन आज हमारा,

लगने को तो अपने बच्चे

लगें सभी को प्यारा.

 सरकारी गोदामों में तो,

अन्न के हैं भंडार.

बचपन जिनका छिनता पहले,

उनका हो अधिकार.

 चलो भूख को आज मिटाएँ

बचपन को लौटाएँ,

जहाँ दिखें बच्चे अब तो,

हम सर्वस्व लुटाएं.

 

राजेश पाठक,
प्रांतीय सचिव
राष्ट्रीय कवि संगम
झारखण्ड इकाई

1 thought on “बचपन बचाओ

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