Mon. Apr 22nd, 2019

नीरज कुमार पाठक अद्भुत

रिश्ते की बात

लड़के ने मेसेज लिखा आप पापा को यही फोटो व्हात्सप्प डीपी लगाने को कहिये. इसमें पापा बहुत सुन्दर लग रहे हैं.

आपको पापा से शादी करनी है कि मुझसे?

लड़के ने कहा “ये आपके पापा हैं इसलिए मुझे आपसे शादी करनी है.” इस पर लड़की ने कोई उत्तर नहीं दिया.

जब शर्मा जी घर पहुंचे तो पत्नी को सारी बात बताई फिर क्या था….

गोबर

आखिर यह कैसी विडंबना है कि हम आत्मशुद्धि के नाम पर शरीर चमकाते हैं और स्वच्छता के नाम पर अपना घर जबकि मन अन्दर से और घर बाहर से मैला ही रह जाता है. पार्षद जी ने मन ही मन ठान लिया कि वे आने वाले गणतंत्र दिवस पर मास्टर जी को सम्मानित करेंगे स्वच्छता में अपना योगदान देने के लिए.

मानसिक खुलेपन की आवश्यकता और परिसीमन

हम दूसरों से अपेक्षा ही क्यों करें, हम ही क्यों नहीं अपनी सीमा को तय करें कि हमें ऐसे रहना है, ऐसे चलना है, ऐसे बोलना है, ऐसे मिलना है, ऐसे उठना है आदि. हम अपने खुलेपन का परिसीमन क्यों नहीं कर सकते. हम इसका हमेशा गलत मतलब क्यों निकाल जाते हैं, यह सोचने की आवश्यकता आज बहुत जरुरी जान पड़ती है बजाये इसके कि हम सबके सुधर जाने की बात करने के हम स्वयं ही सुधर पायें.

error: Content is protected !!