Mon. Apr 22nd, 2019

इतिहास की सच्चाई

हारा हुआ ‘गोरी’ महान हो गया,
जब जयचंद गद्दार भाई-जान हो गया.

इतिहास को छेड़कर तुम देते हो सीख,
कि अकबर ‘राणा’ पे सवार हो गया.

थर्राता था जो, वो तुर्रम खान हो गया,
रणबाँकुर बांका वीर अंतर्ध्यान हो गया.

फाड़ दो उन पन्नों को, जो षडयंत्र से लिखा गया,
सबको पता है कैसे आर्यावर्त, हिंदुस्तान हो गया.

सिकंदर से पूछो उस पुरु की मर्दानगी,
ख्वाब-ए-हिन्द कैसे ढहके कब्रिस्तान हो गया.

मीर जाफर – जयचंद का खानदान हो गया,
पर चोट छाती पे खाई जो, वो घाव हो गया.

पिजा लो खंजरों को अब ऐलान हो गया,
फसल नस्लों की बाकी है, जो शैतान बो गया.

: रचयिता

रविन्द्र कुमार 'रवि'
रविन्द्र कुमार ‘रवि’शिक्षक,
कवि, लेखक, संगीतज्ञ व साहित्यकार

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