Sat. Feb 16th, 2019

हम गांधी नहीं

हम गाँधी नहीं.

दिमाग, उड़ा हवा में,
पैर, जमीन पर रख।
मन चंचल रहने दे ,
जिंदगी के मज़े चख।

बदलाव का वक्त है,
साथियों इसे पहचान।
माँग और पूर्त्ति की,
अर्थशास्त्र को जान।

कुछ कर सकें तो करें,
कुछ वक्त पर छोड़ें।
चुनौतियों को जानें,
अपने -आप से लड़ें।

हम चलें उधर ही,
जिधर हवा बहती।
संकट की आंधी भी,
रोक नहीं सकती।

हम सब कौन हैं?
इसे तो जानें।
हम गांधी नहीं,
इसे तो माने।

सुरेश शक्ति
सुरेश शक्ति

रचयिता : वनवासी विकास आश्रम गिरिडीह के सचिव हैं

2 thoughts on “हम गांधी नहीं

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